
जमानिया। क्षेत्र में धान कटाई अपने चरम पर है, लेकिन सरकारी धान क्रय केंद्रों पर पंजीकरण और सत्यापन की समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेत सत्यापन में देरी, खतौनी में अंश निर्धारण संबंधी त्रुटियों और खाद संकट के मामलों को लेकर भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन ने किसानों के पक्ष में आवाज उठाई है तथा तहसील दिवस पर नायब तहसीलदार से तत्काल समाधान की मांग की है।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के जिलाध्यक्ष अमित कुमार सिंह ने कहा कि तहसील का मुख्य फसल धान है। धान कटाई के बाद किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर बिक्री हेतु पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं। पंजीकरण के बाद लेखपाल एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा भूमि सत्यापन करने के पश्चात ही विक्रय पत्र जारी होता है। किसानों और यूनियन का कहना है कि कई किसान की जमीनें अलग-अलग मौजों में हैं, लेकिन लेखपाल सत्यापन में अनावश्यक देरी कर रहे हैं। एक मौजा का सत्यापन समय पर हो जाता है, जबकि दूसरे मौजा में कई-कई दिनों तक प्रक्रिया रुकी रहती है। इससे पंजीकरण पूर्ण नहीं हो पा रहा और किसान धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। यूनियन ने मांग की है कि लेखपालों को निर्देशित किया जाए कि सत्यापन उसी दिन या अधिकतम अगले दिवस तक अनिवार्य रूप से करें। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन ने बताया कि लेखपालों द्वारा खतौनी में अंश निर्धारण की गलतियाँ लगातार सामने आ रही हैं। एक ही व्यक्ति का नाम दो-दो बार दर्ज होने की वजह से सिस्टम में हिस्से का गलत हिसाब आ रहा है। जैसे—यदि चार बीघे के खसरा में दो किसान दर्ज हैं, तो आधे भाग का पंजीकरण होने के बजाय एक चौथाई हिस्से पर ही पंजीकरण हो पा रहा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। यूनियन ने इस महत्वपूर्ण त्रुटि पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। धान बिक्री के साथ-साथ खाद की समस्या भी किसानों को परेशान कर रही है। सरकारी सोसाइटी पर खाद उपलब्ध न होने से किसानों को बाजार से महंगे दामों पर और संदिग्ध गुणवत्ता का खाद खरीदना पड़ रहा है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन ने स्पष्ट कहा कि यदि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं पहुँची, तो आगामी बुवाई प्रभावित होगी। यूनियन ने प्रशासन से सोसाइटी को पर्याप्त और ससमय खाद आवंटन करने की मांग की है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार किसानों के हित में योजनाएँ चला रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाह रवैये और तकनीकी त्रुटियों के चलते किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा। यूनियन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।




