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भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश

जमानिया। स्थानीय तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर अधिवक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में बार एसोसिएशन जमानिया के अध्यक्ष और महामंत्री को अधिवक्ताओं ने  एक सामूहिक शिकायती पत्र सौंपकर अविलंब बैठक बुलाने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि बीते 30 मार्च को बार-बेंच की बैठक में उपजिलाधिकारी द्वारा समस्याओं के समाधान हेतु एक सप्ताह का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो सप्ताह बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। इससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ आम जनमानस में भी गलत संदेश जा रहा है।
अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आगामी बैठकों की सूचना होने के बावजूद अधिकारी मनमाने ढंग से कोर्ट चला रहे हैं। आरोप है कि 10 अप्रैल को बार की बैठक के समय ही न्यायिक तहसीलदार और तहसीलदार ने आनन-फानन में कोर्ट चलाकर कई पत्रावलियों में अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के प्रतिकूल आदेश पारित कर दिए, जिस पर बार पदाधिकारियों की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। इसके अतिरिक्त, तहसील के विभिन्न न्यायालयों और कार्यालयों में शासन की मंशा के विपरीत प्राइवेट कर्मियों को रखकर व्यापक स्तर पर अवैध धन उगाही करने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि शासन द्वारा इन प्राइवेट कर्मियों को हटाने का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। शिकायती पत्र में बार एसोसिएशन की आंतरिक व्यवस्था और संवेदनशीलता पर भी उंगली उठाई गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय मसूद खाँ के निधन के बाद भी अब तक उनके परिजनों को तयशुदा सहायता राशि उपलब्ध न कराना बार की अकर्मण्यता बताया गया है। साथ ही सोमवार को जब अधिवक्ता प्रदेश में दो साथियों की हत्या के विरोध में ज्ञापन देने उपजिलाधिकारी के पास पहुँचे, तो आरोप है कि वहां उन्हें अपमानित किया गया। अधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के प्रति अमर्यादित भाषा के प्रयोग से बार के सदस्यों में भारी रोष है। इन तमाम ज्वलंत मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिवक्ताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और एसोसिएशन से ठोस रणनीति तय करने हेतु आपात बैठक की मांग की है। इस अवसर पर बृजेश ओझा‚ घनश्याम सिंह‚ विवेक राय‚ धनंजय कुमार राय‚ राम जी राम‚ बृजेश कुमार सिंह‚ कमलकांत राय‚ अमर नाथ राम‚ मनीष कुमार‚ मेराज हसन आदि अधिवक्तागण मौजूद रहे।

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