उत्तर प्रदेशगाजीपुरस्वास्थ्य

गाज़ीपुर में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, आखिर सरकार क्यों है लाचार?

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों का साम्राज्य तेजी से फैल रहा है। गांव-गांव में ऐसे फर्जी डॉक्टर खुलेआम लोगों की जान से खेल रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ कागज़ों में कार्रवाई दिखा रहे हैं।

जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों का साम्राज्य तेजी से फैल रहा है। गांव-गांव में ऐसे फर्जी डॉक्टर खुलेआम लोगों की जान से खेल रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ कागज़ों में कार्रवाई दिखा रहे हैं। सवाल यह है आखिर सरकार और प्रशासन इन पर लगाम लगाने में लाचार क्यों है?

कौन हैं ये झोलाछाप डॉक्टर-

ये वही लोग हैं जिनके पास न तो मेडिकल डिग्री है, न ही इलाज का कोई वैध प्रशिक्षण। कुछ पहले किसी डॉक्टर के कंपाउंडर या फार्मेसी अटेंडेंट रह चुके होते हैं और बाद में खुद डाक्टर बनकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने लगते हैं।
ग्रामीण जनता की मजबूरी और सरकारी अस्पतालों की बदहाली ने इन फर्जी डॉक्टरों को “भगवान” बना दिया है।

चौंकाने वाले आंकड़े-

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट बताती है कि देश के करीब 40% प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोई MBBS डॉक्टर तैनात नहीं है। जब सरकारी अस्पताल ही मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं,तो जनता मजबूरी में इन्हीं झोलाछापों के पास जाती है।

सीएमओ स्तर से कार्रवाई सिर्फ दिखावे की-

गाज़ीपुर जनपद में अधिक झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई केवल नाम की होती है।लेकिन कुछ ही महीनों में वे फिर से सक्रिय हो जाते हैं। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि कई जगह सेटिंग और सांठगांठ के जरिए ये झोलाछाप दोबारा दुकान खोल लेते हैं।राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलने से इन पर लगाम कसना लगभग असंभव हो गया है।

दवा कंपनियों की मिलीभगत

जांच में सामने आया है कि कुछ फार्मा कंपनियाँ झोलाछाप डॉक्टरों को सस्ते दाम पर दवाएँ उपलब्ध कराती हैं ताकि उनकी बिक्री बढ़े। बदले में झोलाछाप डॉक्टर बिना जांच-पड़ताल के वही दवाएं हर मरीज को परोस देते हैं। चाहे बीमारी कुछ भी हो।

जनता की बेबसी,सरकार की चुप्पी

गांवों में सरकारी अस्पताल तो हैं, पर डॉक्टर और दवाएं नहीं। मरीजों को कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। ऐसे में झोलाछाप डॉक्टर ही गरीब जनता की पहली और आखिरी उम्मीद बन जाते हैं। सवाल ये है कि जब स्वास्थ्य विभाग जानता है कि कौन-कौन फर्जी डॉक्टर हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?

झोलाछापों से जान का खतरा-

गलत इंजेक्शन,एक्सपायर्ड दवाएं और झूठी आश्वासन,यही इन फर्जी डॉक्टरों का हथियार है। हर साल सैकड़ों लोग इनके इलाज से गंभीर बीमारियों का शिकार बनते हैं, कई की तो जान चली जाती है। फिर भी कोई जवाबदेही तय नहीं होती!

क्या करना होगा सरकार को?

अगर सच में सरकार जनता की चिंता करती है,तो उसे चाहिए कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को सक्रिय और दवाओं से संपन्न बनाया जाए।झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई और लाइसेंस व्यवस्था लागू की जाए।जनता को जागरूक किया जाए कि डिग्रीधारी डॉक्टर से ही इलाज कराएं।नए डॉक्टरों के लिए ग्रामीण सेवा को अनिवार्य किया जाए।

त्रिनेत्र न्यूज़ की मांग-

झोलाछाप डॉक्टरों पर सिर्फ दिखावे की नहीं,सख्त कार्रवाई हो।स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर जवाबदेही तय हो वरना हर गांव में जिंदगी और मौत के बीच की लाइन यूं ही धुंधली होती रहेगी।



सहयोग करें

हम देशहित के मुद्दों को आप लोगों के सामने मजबूती से रखते हैं। जिसके कारण विरोधी और देश द्रोही ताकत हमें और हमारे संस्थान को आर्थिक हानी पहुँचाने में लगे रहते हैं। देश विरोधी ताकतों से लड़ने के लिए हमारे हाथ को मजबूत करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page