तीन ग्राम पंचायतों में एक ही सचिव पर फर्जी वेण्डर फीडिंग और भुगतान का संगीन आरोप, DDO से शिकायत

गाजीपुर। करंडा विकास खण्ड में ग्राम पंचायतों की रीढ़ मानी जाने वाली व्यवस्था इन दिनों सवालों के कठघरे में खड़ी है। ग्राम सभा कुचौरा, रामनाथपुर और मकसूदन पाह (महाबलपुर) तीनों ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने एक ही पंचायत सचिव संतोष कुमार पर मनमानी, फर्जी वेण्डर फीडिंग और फर्जी भुगतान जैसे गंभीर आरोप लगाकर अपने- अपने लेकर पैड पर डीडीओ को शिकायती पत्र सौंपा है।
ग्राम पंचायत कुचौरा के ग्राम प्रधान बबलू खरवार ने शिक़ायती पत्र में बताया कि कम्पोजिट विद्यालय कुचौरा में निर्मित बालक-बालिका शौचालय के भुगतान के दौरान ह्यूम पाइप और रिबोर कार्य के नाम पर तेजस इंटरप्राइजेज, बीबीएस हार्डवेयर एवं प्लाई बोर्ड के माध्यम से फर्जी भुगतान किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्शाए गए भुगतान की एमबी और स्टेटमेंट संबंधित जेई द्वारा बनाए ही नहीं गए, फिर भी भुगतान निर्गत कर दिया गया।
इसी बीच भुगतान प्रक्रिया के दौरान प्रधान की पुत्री के छत से गिरकर घायल होने और जिला अस्पताल पहुंचने की घटना ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
वहीं ग्राम पंचायत रामनाथपुर और मकसूदन पाह (महाबलपुर) के ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया है कि सचिव द्वारा बिना किसी टेण्डर प्रक्रिया के नए वेण्डरों की फीडिंग कराई गई, जिनके माध्यम से कमीशनखोरी और फर्जी भुगतान का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। प्रधानों का कहना है कि इसी को लेकर सचिव और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे ग्राम सभा के विकास कार्य पूरी तरह ठप होते जा रहे हैं। तीनों ग्राम प्रधानों ने अपने – अपने लेटर पैड पर जिला विकास अधिकारी से लिखित शिकायत कर सचिव को तत्काल हटाकर निष्पक्ष जांच और किसी अन्य सचिव की तैनाती की मांग की है। इस बाबत सचिव संतोष कुमार ने बताया कि जन ग्राम पंचायत में भुगतान नहीं हुआ है उन ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान द्वारा भी आरोप लगाया जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि एक ही सचिव पर तीन ग्राम पंचायतों से एक जैसे आरोप महज़ संयोग हैं या संगठित घोटाले की ओर इशारा?, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर बिना एमबी बने भुगतान किसके आदेश पर हुआ, क्या पंचायतों का पैसा सिस्टम की मिलीभगत से लूटा जा रहा है?
फिलहाल पूरे मामले ने करण्डा ब्लॉक में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पंचायती भ्रष्टाचार की आग को बुझाने के लिए क्या सख्त कदम उठाता है या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।




