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संपूर्ण समाधान दिवस में तहसील जखनियां की खुली पोल: बुजुर्ग दंपति ने हल्का लेखपाल पर लगाया गंभीर आरोप,10 हजार न देने पर नहीं मिला जमीन पर कब्जा

गाजीपुर। जखनियां तहसील एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में आ गई है। तहसील के लेखपाल और कानूनगों (राजस्व निरीक्षक) पर एक बुजुर्ग दंपति से कथित तौर पर 10 हजार की रिश्वत मांगने और पैसा न देने पर जमीन पर कब्जा न दिलाने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) जखनियां को पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया है और न्याय की गुहार लगाई है। तहसील क्षेत्र के हंसराजपुर बभनौली निवासी पूनम देवी पत्नी राजकुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि ग्राम सभा रंजीतपुर में स्थित है, जिसकी आराजी संख्या 141 और 142 है। उन्होंने इन संयुक्त आराजियों से एक बिस्सा भूमि की विधिवत रजिस्ट्री कराई है और उसी भूमि पर अपना आवासीय मकान बनवाना चाहती हैं। लेकिन संबंधित लेखपाल और कानूनगों द्वारा जानबूझकर कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है और समस्या का समाधान टालमटोल कर टाल दिया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि लेखपाल और कानूनगों खुलेआम 10 हजार रुपए की मांग कर रहे हैं और पैसा न देने पर साफ शब्दों में कहा गया कि “मौके पर नहीं जाएंगे और कब्जा भी नहीं दिलाएंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार तहसील के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि जखनियां तहसील में बिना “चाय-पानी” के कोई भी काम नहीं होता। राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी खुलेआम रिश्वत की मांग करते हैं। लोगों का कहना है कि जमीन संबंधी नापी, रिपोर्ट, दाखिल-खारिज या अन्य राजस्व कार्य बिना पैसे दिए आगे नहीं बढ़ते, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पीड़िता पूनम देवी ने जिलाधिकारी अविनाश कुमार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों का प्रशासन और शासन व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। उन्होंने बताया कि वे व्यक्तिगत रूप से जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराने की योजना बना रही हैं।
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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