
जमानियाँ (गाजीपुर)। क्षेत्र के पशुओं में लंपी बीमारी व प्रोटोजोआ रोग फैलने की सूचना से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है, इस बिमारी से गाय ज्यादा प्रभावित हो रही हैं।
लंपी बीमारी के प्रकोप से पशुओं का वजन तेजी से कम होने लगता है और वे खान-पान छोड़ देती हैं तथा प्रभावित पशुओं के पैरों में सूजन व शरीर पर बड़े-बड़े दाने उभरने लगते हैं, वहीं प्रोटोजोआ रोग में पशुओं को बुखार सहित कॉफी के रंग का पेशाब होता है, जिससे ब्लड की कमी से कमजोरी हो जाता है। ग्राम बरुइन निवासी पशु पालक काशीनाथ सिंह ने बताया कि प्रोटोजोआ रोग के कारण गाय का पेशाब कॉफी रंग का निकलने लगा। ईलाज के दौरान भी कमजोरी दूर होने का नाम नहीं ले रही थी अंततः गाय की मृत्यु हो गई। राजकीय पशु चिकित्साधिकारी डॉ सर्वेश कुमार ने बताया कि लम्पी बीमारी के प्रति पशु चिकित्सा विभाग काफी सक्रिय हैं और चिकित्सकों की टीम गांवों में जाकर पशुओं का इलाज व टीकाकरण कर रही है। यदि किसी पशुपालक को अपनी गायों में प्रोटोजोआ रोग व लंपी बिमारी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को सूचित कर इलाज कराये। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा संचालित मोबाइल टीम को 1962 पर कॉल करके समाधान कराया जा सकता है। प्रोटोजोआ परजीवियों के कारण होते हैं और पशुओं में बुखार, रक्ताल्पता, दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। ये रोग किलनी, गंदे पानी या संक्रमित भोजन के माध्यम से फैल सकते हैं और पशु की मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं। लंपी एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए पशुपालन विभाग ने सलाह दी कि संक्रमित पशुओं को तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखा जाए, ताकि बीमारी का फैलाव न हो सके।
यह रोग मक्खियों, मच्छरों के काटने व कीचड़ से फैलता है। संक्रमित पशुओं में हल्का बुखार व शरीर पर गांठें उभर आती हैं। पशुशाला की दैनिक सफाई और डिसइन्फैक्शन का स्प्रे करते रहना चाहिए। समय से उपचार करने से दोनों रोगों का निदान सम्भव है।




