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थानाध्यक्ष का सरकारी मोबाइल बना हमराहियों का निजी फोन!पत्रकारों को टालने का नया तरीका या व्यवस्था की बिगड़ती नजीर?

गाजीपुर। भांवरकोल थाना क्षेत्र में एक हैरान करने वाली स्थिति सामने आई है, जहां थानाध्यक्ष का सरकारी CUG नंबर अब ‘हमराही आरक्षियों’ के हाथ का खिलौना बन चुका है। जनसंचार के इस महत्वपूर्ण माध्यम से न तो आमजन की समस्याएं सुनी जा रही हैं, न ही पत्रकारों को समय पर जानकारी मिल पा रही है। सवाल यह है कि क्या यह सस्ती लापरवाही है या सुनियोजित बेरुखी?

पत्रकार राहुल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 18 मई की रात 9:30 बजे एक गंभीर प्रकरण में थानाध्यक्ष से बात करने हेतु कॉल किया गया। लेकिन फोन उठाया हमराही कांस्टेबल गौरव राय ने और सीधा जवाब—”साहब व्यस्त हैं”—देकर बात टाल दी। इससे भी चिंताजनक स्थिति 24 मई को देखने को मिली, जब दोपहर 4:06 बजे फिर से कॉल करने पर किसी अन्य आरक्षी ने फोन उठाया और पत्रकार को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

प्रश्न सीधा है—सरकारी नंबर किसके लिए है? पत्रकारों और जनता से संवाद के लिए या ‘हमराही विशेषाधिकार’ के लिए? यदि एक थानाध्यक्ष स्वयं अपने सरकारी नंबर पर जवाब नहीं दे पा रहे हैं और उसकी बागडोर सहयोगी आरक्षियों के हाथ में है, तो यह स्थिति प्रशासनिक शिष्टाचार का सीधा मखौल है।

यह चुप्पी किसकी सहमति से है?
क्या जिले के उच्चाधिकारियों को इस रवैये की जानकारी है?
क्या पत्रकारों को यूं टालना अब पुलिसिंग का नया प्रोटोकॉल बन चुका है?

भांवरकोल पुलिस से जवाब चाहिए—साफ, सीधा और तत्काल। वरना यही चुप्पी कल को प्रशासन की साख पर सवाल बन जाएगी।

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