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समाजवादी रिश्तों की गूंज: अखिलेश यादव ने याद किए पूर्वांचल के गांधी

गाजीपुर। पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को सिधौना पहुंचकर अपने राजनीतिक और पारिवारिक जुड़ाव की पुरानी परंपरा को एक बार फिर जीवित कर दिया। उन्होंने यहां पूर्वांचल के गांधी कहे जाने वाले स्व. रामकरन यादव के परिवार से मुलाकात कर उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता जताई।
रामकरन यादव, जिन्हें समाजवादी आंदोलन में उनके योगदान और सादगी के लिए पूरे पूर्वांचल में जाना जाता है, का परिवार तीन पीढ़ियों से सपा नेतृत्व से जुड़ा रहा है। 1969 में जब मुलायम सिंह यादव ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, तब टिकट दिलाने में रामकरन यादव की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच गहरा आत्मीय रिश्ता बन गया, जो दशकों तक कायम रहा।
यही रिश्ता आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव आज सिधौना पहुंचे। हेलिकॉप्टर से उतरते ही स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने रामकरन यादव पीजी कॉलेज परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। अखिलेश यादव ने कहा कि “दादा जी जैसे लोगों के कारण ही समाजवादी आंदोलन को जन-जन तक पहुंचने की ताकत मिली। उनके आदर्श हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।”
उन्होंने दादा के पुत्र और पूर्व एमएलसी विजय यादव तथा परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने परिवार के युवा सदस्य आशीष यादव उर्फ राहुल को भी आशीर्वाद दिया और राजनीति में आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं।
करीब पंद्रह मिनट रुकने के बाद सपा अध्यक्ष वाराणसी के लिए रवाना हो गए, लेकिन उनके आगमन से सिधौना में दिनभर उत्साह और सियासी हलचल बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना था कि अखिलेश यादव की यह यात्रा सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि उस पुरानी समाजवादी विरासत के सम्मान का प्रतीक थी, जिसे मुलायम सिंह यादव और रामकरन दादा ने मिलकर जिया था।

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