मानवाधिकार आयोग ने डीएम से मांगा स्पष्टीकरण, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता की शिकायत पर कड़ा रुख

गाजीपुर। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय द्वारा “नोनहरा कांड” में पीड़ित सीताराम उपाध्याय के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत पर आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है।
मामला Case No. 21168/24/32/2025 – HRCNET, UP-SHRC के रूप में पंजीकृत है। अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और कानूनन आधारों को देखते हुए आयोग ने जिलाधिकारी गाजीपुर को निर्देशित किया था कि वे 17 नवंबर 2025 तक विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) आयोग को अविलंब भेजें।
लेकिन निर्धारित तिथि तक DM द्वारा कोई आख्या प्रस्तुत न किए जाने पर मानवाधिकार आयोग ने 18 नवंबर 2025 को गहरी नाराज़गी व्यक्त की है और डीएम गाजीपुर से स्पष्ट रूप से “क्यों आख्या समय से नहीं भेजी गई?” इस पर स्पष्टीकरण तलब किया है। आयोग ने आदेश दिया है कि किसी भी दशा में 6 जनवरी 2026 तक पूरी आख्या एवं समय पर आख्या न देने का स्पष्टीकरण आयोग को प्रस्तुत किया जाए। साथ ही आयोग ने इस पत्रावली को 7 जनवरी 2026 दोपहर 1:00 बजे पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
सरकार की ओर से SIT जांच की बात कही गई थी, किंतु अब तक किसी भी स्तर पर जांच आगे बढ़ी यह पता आज तक नहीं चला। परिणामस्वरूप, पीड़ित पक्ष को कानूनी राहत की उम्मीदें कमजोर पड़ती दिख रही थीं। लेकिन अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय द्वारा सशक्त पैरवी, निरंतर अनुगमन और मामले को सही मंच पर उठाए जाने से मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया और अब जिलाधिकारी स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि डीएम की ओर से आयोग को प्रभावित करने योग्य, तथ्यात्मक और समयबद्ध आख्या नहीं पहुंचाई जाती, तो आयोग आगे और कठोर कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है। इस प्रकरण में अधिवक्ता दीपक कुमार पांडे की कार्यशैली, संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की चारों ओर सराहना हो रही है। उनकी कानूनी पैरवी के कारण यह महत्वपूर्ण मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।




