
जमानिया। विकास खंड के ग्राम जीवपुर में शुक्रवार को संत पंकज जी महाराज की 83 दिवसीय जनजागरण यात्रा का पड़ाव पहुंचा। यहां आयोजित सत्संग सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मानव जीवन की नश्वरता और ‘सुरत शब्द योग’ का मर्म समझाया।
संत पंकज जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि यह मानव शरीर एक किराये के मकान की तरह है। अगर यह आपका अपना होता तो हमेशा आपके साथ रहता, लेकिन जीवन भर जिन भौतिक वस्तुओं को ईमानदारी या बेईमानी से जुटाया जाता है, वे सब अंत में यहीं छूट जाती हैं। उन्होंने कहा कि शरीर से अलग होते ही यह जड़ हो जाता है, जबकि जीवात्मा जन्म-जन्मांतरों से भूखी है। इसका असली भोजन ‘शब्द’ है जो भजन से प्राप्त होता है। उन्होंने साधना की विधि समझाते हुए कहा कि बाहरी कानों को बंद करके प्रभु के घर से आ रही आवाज (आकाशवाणी/अनहदवाणी) को जीवात्मा के कानों से सुनना ही सच्चा भजन है। ढोल-मंजीरा बजाना बाहरी क्रिया है। उन्होंने लोगों से शाकाहारी और सदाचारी बनने तथा शराब जैसे मादक पदार्थों का त्याग कर अच्छे समाज के निर्माण में भागीदार बनने का आह्वान किया। महाराज जी ने आगामी 3 से 5 मार्च तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आयोजित होने वाले होली सत्संग मेले में शामिल होने के लिए सभी को आमंत्रित किया। कार्यक्रम के बाद जनजागरण यात्रा अपने अगले पड़ाव ग्राम मलसा के लिए प्रस्थान कर गई, जहां शनिवार दोपहर 12 बजे सत्संग होगा। शांति व्यवस्था में पुलिस प्रशासन का सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर जंगबहादुर सिंह यादव, डॉ. सत्य नारायण दुबे, उदयनारायण, रामाश्रय यादव, राम अवध यादव, सतीश सिंह (रायबरेली), नरेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में संगत व सहयोगी उपस्थित रहे।



