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हमारा प्रयास पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए: मुख्य राजस्व अधिकारी

गाजीपुर। मुख्य राजस्व अधिकारी आयुष चौधरी की अध्यक्षता में अभियोजन की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुयी। बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 27 वाद निस्तारित हुए जिसमें से 03 में सजा हुई, 18 वाद में अभियुक्त रिहा हुआ तथा 15 वाद में अभियुक्त पक्षद्रोहिता के कारण रिहा हुए। अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 09 वाद निस्तारित हुए, जिसमें से 09 वाद में अभियुक्त को सजा हुआ। थाना भुड़कुड़ा मु0अ0सं0 120/2024 वाद सं0 1087/2024 धारा 80,85, बी.एन. एस.एस. व 3/4 डी.पी. एक्ट स्टेट बनाम संदीप कश्यप में मा० जनपद न्यायाधीश न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को 10 वर्ष की सश्रम कारावास व रू० 8000 अर्थदण्ड लगाया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी कृपाशंकर राय, डी.जी.सी. द्वारा किया गया। थाना जमानियाँ मु0अ0सं0 641/2008 वाद सं0 312/2011 धारा 308 भा०द०वि० स्टेट बनाम रविन्द्र यादव में मा० ए०डी० जे० प्रथम- न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को 03 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा दी गयी। उक्त वाद में कुशल पैरवी नीरज श्रीवास्तव, ए. डी.जी.सी. द्वारा किया गया। थाना जमानियाँ मु0अ0सं0 208/2012 वाद सं0 300/2012 धारा 323/34, 504,304/34 भा०द०वि० स्टेट बनाम कलामुद्दीन में मा० ए०डी० जे० तृतीय- न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा 12000/अर्थदण्ड लगाया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी जयप्रकाश सिंह, ए.डी.जी.सी. द्वारा किया गया। कुल 341 वारण्ट निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 244 वारण्ट तामिल हुए तथा 212 गवाह उपस्थित हुए जिसमें से 203 गवाह परीक्षित हुए तथा 09 गवाह अपरीक्षित हुए क्योंकि पीठासीन अधिकारी अवकाश पर रहे तथा अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से विरत रहे। कुल 49 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए जिसमें 03 जमानत स्वीकृत हुए तथा 46 जमानत प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हुए। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा लोक अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा कर ले। यदि पुनः अपील किया जाना शासकीय हित में हो तो पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करे। गंभीर धाराओं में अधिक से अधिक जमानत प्रार्थना पत्रों को अस्वीकृत कराया जाए। हमारा प्रयास पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए। इसके लिए पत्रावली में वादी के अलावा अन्य उपलब्ध साक्षियों का भी साक्ष्य कराया जाए। बैठक में अभियोजन के अधिकारी/ कर्मचारी एवं शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) उपस्थित रहें।

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