उत्तर प्रदेशगाजीपुर

बजट 2026: सरलीकरण की दिशा में कदम, किंतु पूर्वांचल की झोली खाली- दीपक कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद

माननीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 का विश्लेषण यदि विधिक और क्षेत्रीय धरातल पर किया जाए, तो यह ‘मिश्रित भावनाओं’ वाला बजट प्रतीत होता है। एक ओर जहाँ कानून के सरलीकरण का दावा है, वहीं दूसरी ओर गाजीपुर सहित संपूर्ण पूर्वांचल के लिए इसमें कोई ठोस ‘गेम-चेंजर’ योजना नजर नहीं आती।
विधिक एवं सकारात्मक पक्ष (Legal & Policy Perspective)
आयकर अधिनियम 2025 का स्वागत: 1961 के पुराने पड़ चुके आयकर कानून को बदलकर नया अधिनियम लाना समय की मांग थी। एक अधिवक्ता के रूप में, मैं इसे मुकदमेबाजी (Litigation) को कम करने वाला कदम मानता हूँ। कर कानूनों में अस्पष्टता ही विवादों की जड़ होती है, जिसे दूर करने का प्रयास सराहनीय है।
दवाओं पर सीमा शुल्क की समाप्ति: कैंसर की 17 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाना नागरिकों के ‘जीवन के अधिकार’ (अनुच्छेद 21) को सुदृढ़ करता है। यह एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुकूल है।
डिजिटल न्याय की ओर: डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए आवंटन से ई-कोर्ट्स और न्याय प्रणाली में तकनीक के उपयोग को गति मिलेगी।
पूर्वांचल और जनपद गाजीपुर की उपेक्षा (Regional Disparity)
एक स्थानीय नागरिक और विधि व्यवसायी होने के नाते, बजट में क्षेत्रीय संतुलन का अभाव स्पष्ट दिखता है:
गाजीपुर और औद्योगिक शून्यता: पूर्वांचल का हृदय कहे जाने वाले गाजीपुर जनपद में कृषि-आधारित उद्योगों या नए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की कोई घोषणा नहीं हुई है। यहाँ के युवाओं के पलायन को रोकने के लिए बजट में किसी ‘इंडस्ट्रियल क्लस्टर’ का उल्लेख न होना निराशाजनक है।
शिक्षा और रोजगार का संकट: पूर्वांचल के मेधावी छात्रों के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी संस्थानों (जैसे IIT या IIM की तर्ज पर नए संस्थान) के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है। केवल डिजिटल लाइब्रेरी से जमीनी बेरोजगारी दूर नहीं होगी।
कृषि क्षेत्र में ठोस पहल का अभाव: गाजीपुर एक कृषि प्रधान जनपद है। ‘भारत-विस्तार’ एआई प्लेटफॉर्म जैसे शब्द सुनने में अच्छे हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर भंडारण (Cold Storage) और सीधे बाजार से जुड़ाव के लिए ठोस बजट की कमी खलती है।
बजट की प्रमुख खामियां (Shortcomings)
पूंजी बाजार पर कर का बोझ: STT में वृद्धि और Buyback पर टैक्स ने निवेश को हतोत्साहित किया है। यह मध्यम वर्ग की बचत पर सीधा प्रहार है।
महंगाई पर मौन: दैनिक उपभोग की वस्तुओं और निर्माण सामग्री (सीमेंट, सरिया) की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी नीतिगत बदलाव नहीं दिखा, जिससे आम आदमी का घर बनाने का सपना महंगा होता जा रहा है।
न्यायिक बुनियादी ढांचे की अनदेखी: अधिवक्ताओं के कल्याण, चैंबर्स के निर्माण और जिला अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए किसी केंद्रीय फंड की कमी इस बजट का सबसे कमजोर पहलू है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, बजट 2026 बड़े कॉरपोरेट और तकनीकी सुधारों के लिए तो बेहतर हो सकता है, लेकिन गाजीपुर जैसे जनपदों और पूर्वांचल की आर्थिक प्रगति के लिए इसमें ‘विशिष्टता’ का अभाव है। विकास की गंगा को तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता जब तक वह गाजीपुर के आखिरी व्यक्ति के खेत और खलिहान तक न पहुंचे।

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