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शिक्षा, आरक्षण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं ने अनुसूचित जातियों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है : मंजू कुमारी

गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में समाजशास्त्र विषय की शोधार्थिनी मंजू कुमारी ने अपने शोध प्रबंध शीर्षक “अनुसूचित जातियों में सामाजिक एवं राजनीतिक गतिशीलता के बदलते प्रतिमान : जौनपुर जनपद का समाज वैज्ञानिक अध्ययन” नामक विषय पर शोध प्रबन्ध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस अध्ययन में शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक चेतना और नेतृत्व विकास जैसे प्रमुख आयामों का गहन विश्लेषण करके पाया कि पिछले कुछ दशकों में अनुसूचित जातियों की सामाजिक स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। शिक्षा के प्रसार, शहरीकरण, सरकारी योजनाओं और आरक्षण नीति के प्रभाव से नई पीढ़ी में आत्मविश्वास, अधिकार बोध और सामाजिक गतिशीलता बढ़ी है। उच्च शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में बढ़ती भागीदारी ने पारंपरिक पेशागत सीमाओं को तोड़ा है और सामाजिक सम्मान में वृद्धि की है। राजनीतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पंचायत राज व्यवस्था के सशक्तिकरण तथा स्थानीय निकायों में आरक्षण के कारण अनुसूचित जातियों की राजनीतिक सहभागिता बढ़ी है। अध्ययन के अनुसार जौनपुर जनपद में ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रतिनिधित्व में वृद्धि ने नेतृत्व क्षमता को विकसित किया है। इससे सामाजिक न्याय, समानता और भागीदारी आधारित लोकतंत्र को मजबूती मिली है। हालांकि अध्ययन यह भी इंगित करता है कि सामाजिक भेदभाव, आर्थिक असमानता और संसाधनों तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत सोच और संरचनात्मक बाधाएँ सामाजिक गतिशीलता को आंशिक रूप से प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद नई पीढ़ी में शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक जागरूकता के माध्यम से परिवर्तन की स्पष्ट प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। यह शोध जौनपुर जनपद की सामाजिक संरचना को समझने तथा नीतिनिर्माताओं, शिक्षाविदों और समाजशास्त्रियों के लिए उपयोगी आधार प्रस्तुत करता है। अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, आर्थिक अवसरों का विस्तार तथा सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों को और सुदृढ़ किया जाए, जिससे अनुसूचित जातियों की सामाजिक एवं राजनीतिक गतिशीलता को और अधिक गति मिल सके। यह अध्ययन सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है और यह दर्शाता है कि समावेशी नीतियाँ एवं लोकतांत्रिक भागीदारी समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकती हैं।
प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्रों  द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थिनी मंजू कुमारी ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबन्ध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया।
    इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे. (डॉ.) जी० सिंह, शोध निर्देशक डॉ० सुशील कुमार  सिंह, समाज शास्त्र विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिमुर्ति सिंह, प्रोफे.(डॉ.)अरुण कुमार यादव, डॉ. रामदुलारे, डॉ.अशोक कुमार, डॉ राकेश वर्मा, डॉ धर्मेंद्र, डॉ प्रदीप रंजन, डॉ मंजीत सिंह, डॉ. उमा निवास मिश्र, डॉ. योगेश कुमार, डॉ.शिवशंकर यादव, डॉ. लव जी सिंह, डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रोफे० (डॉ.) रविशंकर सिंह एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्रएं आदि उपस्थित रहे। अंत में अनुसंधान एवं विकास प्रोकोष्ठ के संयोजक प्रोफे.(डॉ.) जी. सिंह ने संचालन एवं सबका आभार व्यक्त किया।

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