उत्तर प्रदेशकृषिगाजीपुर

सभी किसानों को बनवाना है फार्मर रजिस्‍ट्री- सीडीओ

संतोष वैश्य(मुख्य विकास अधिकारी) गाज़ीपुर

गाजीपुर। जनपद में चल रहे फॉर्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) के लिए विशेष अभियान के अन्तर्गत, जिसके परिपेक्ष्य में जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य की अध्यक्षता में मुख्य विकास अधिकारी कक्ष में प्रेसवार्ता की गयी। प्रेसवार्ता के दौरान मुख्य विकास अधिकरी ने बताया कि जनपद में 571518 कृषक पंजीकृत है, जिनमें से कल रात तक 442482 कृषकों की फार्मर रजिस्ट्री अर्थात किसान पहचान पत्र बना दिए गये थे, जो 77.45 प्रतिशत है। अभी भी जनपद में 129036 कृषकों की फार्मर रजिस्ट्री बनाया जाना अवशेष है। शासन के निर्देश पर 6 अप्रैल, 2026 से जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में कैम्प लगाकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का कार्य मौके पर ही किया जा रहा है। 08 अप्रैल, 2026 के शासनादेश के अनुसार अब सभी किसान चाहे वह पी०एम० किसान के लाभार्थी हो अथवा नहीं, सभी की फार्मर रजिस्ट्री बनाना जा रहा है। किसानों को उर्वरक, बीज, कृषि रक्षा रसायन, कृषि यंत्र, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, पी०एम० किसान की अगली किश्त तथा कृषि से सम्बद्ध अन्य विभाग जैसे- उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, लघु सिंचाई, गन्ना, दुग्ध तथा अन्य विभागों की लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ फार्मर रजिस्ट्री होने पर ही दिया जाएगा। 06 अप्रैल, 2026 से प्रारम्भ फार्मर रजिस्ट्री के विशेष अभियान में अब तक 50,000 से अधिक कृषकों की फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकी है। यह कार्य सभी ग्राम पंचायत में कैम्पों के माध्यम से तथा सभी सहज जनसेवा केन्द्र पर बनवाया जा सकता है। किसान स्वयं भी मोबाइल एप को डाउनलोड करके अपनी फार्मर रजिस्ट्री बना सकता है। किसान भाइयों से अपील है कि अपना मोबाईल, आधार कार्ड एवं खतौनी लेकर सर्वेच्च प्राथमिकता के आधार पर नजदीकी जन सुविधा केन्द्र अथवा अपने गाँव के कैम्प में पहुंच कर फार्मर रजिस्ट्री आज ही बनवायें। गाँव एवं कैम्पों के निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि किसान भाई फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान उनके मोबाईल पर आई ओ०टी०पी० को लेखपाल, पंचायत सहायक/ सचिव, कृषि विभाग के कर्मचारी अथवा सहज जनसेवा केन्द्र के संचालक को बताने में झिझक रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों को स्वयं अपनी उपस्थिति में ओ०टी०पी० बताने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह उनका ही कार्य कर रहे हैं। कोई आशंका होने पर अपने ग्राम प्रधान, कोटेदार, लेखपाल, पंचायत सचिव, पंचायत सहायक अथवा कृषि विभाग के कर्मचारी से किसान भाई सम्पर्क कर सकते हैं। उन्होने पराली के प्रबंधन के बारे में बताया कि फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिये शासन स्तर से निर्देश प्राप्त हुये है। फसल कटाई के समय फसलों के अवशेष, कूड़ा एवं कांस सरपत इत्यादि खर पतवार जलाने से वातावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचता है। जनपद मे इस वर्ष कूड़ा करकट, खर पतवार, कांस सरपत इत्यादि में आग लगाने की कुल 136 घटनाये प्रकाश में आयी है। इन घटनाओं की मौके पर जॉच कराने पर पता चला है कि 125 घटनाओं में कुश एवं सरपत में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आग लगायी गयी है। 06 घटनाओं में फसल कटाई के बाद शार्ट शर्किट/ ट्रांसफार्मर में आग लगने के कारण घटना घटी है। 02 घटनाओं में खड़ी फसल में बिजली के शार्ट सर्किट से तथा 01 घटना में अज्ञात कारणों से आग लगनी पायी गयी है तथा 02 घटनाओं में कूड़ा जलाना पाया गया। जनपद में उपरोक्ट सभी घटनाओं को सैटेलाईट द्वारा रिकार्ड किया गया है। किसी भी घटना में गेहू के फसल अवशेष (भूसा) में आग लगाये जाने की कोई घटना प्रकाश में नहीं आयी है। फसल अवशेष जलाये जाने पर जुर्माने का प्रावधान है। 02 एकड़ से कम क्षेत्र वाले किसानों पर फसल अवशेष जलाने पर रू0 5000.00, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र वाले किसानों पर रू0 10000.00 एवं 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिये रू० 30000.00 तक जुर्माने का प्रावधान है। किसानों से अपील है कि किसी भी प्रकार के फसल अवशेष, कूड़ा करकट, कांस सरपत जैसे खर पतवारों में आग न लगाये, इससे पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचता है। फसल अवेशष जलाने की पुष्टि होने पर जुर्माने की कार्यवाही की जायेगी। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि एवं मीडिया बन्धु उपस्थित रहे।

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