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किसानों की समस्याओं को लेकर विधायक प्रतिनिधि धमके पंप कैनाल

जमानिया। क्षेत्र में भीषण गर्मी और पानी की कमी के चलते किसानों की धान की नर्सरी सूखने की कगार पर पहुंच गई है। नहरों में पानी की भारी किल्लत की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, पूर्व मंत्री व स्थानीय वर्तमान विधायक ओम प्रकाश सिंह के निर्देश पर उनके प्रतिनिधि ने चक्काबांध गांव स्थित पंप कैनाल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने मौके पर पाई गई कमियों को दूर कराया और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए।

विधायक प्रतिनिधि ने बताया कि विधायक ओम प्रकाश सिंह के पास सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के  किसानों ने शिकायत दर्ज कराई थी। किसानों का कहना था कि धान की बुवाई का समय आ चुका है और नहरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी पूरी तरह सूख रही है। मौसम की मार और पानी के अभाव से किसान बेहद परेशान और बदहाल हैं। इसी जनसमस्या के त्वरित निस्तारण के लिए विधायक के निर्देशानुसार यह दौरा किया गया। पंप गृह के निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद मिले। हालांकि, कैनाल पर कुल 8 पंप मोटरों में से एक को स्टैंडबाई (आपातकालीन स्थिति) पर रखकर 7 मोटरों को नियमित रूप से चलना था, लेकिन मौके पर केवल 6 मोटरें ही चलती हुई पाई गई। विधायक प्रतिनिधि ने तुरंत अधिकारियों से इस पर बात की और उनके सामने ही सातवीं बंद मोटर को भी चालू कराया गया। वर्तमान में जमानियां पंप हाउस पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहा है, हालांकि अधिकारियों ने अवगत कराया कि गंगा नदी का जलस्तर नीचे होने के कारण मोटरों के जलने की संभावना बनी रहती है, जिसके चलते कभी-कभी सावधानीवश किसी एक मोटर को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ता है।

टर्न (हफ्तावार) व्यवस्था का विरोध, नियम बदलने के निर्देश
किसानों की एक बड़ी समस्या नहरों के संचालन के लिए बनाई गई हफ्तावार व्यवस्था को लेकर भी सामने आई। विधायक प्रतिनिधि ने साफ कहा कि हालांकि प्रशासन ने यह निर्णय किसानों के हित में सोचकर लिया होगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह फैसला पूरी तरह किसानों के विपरीत जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी धान का पौधा बहुत छोटा है और नर्सरी को तैयार करने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता है। ऐसे में 7 दिन पानी देने और 7 दिन बंद रखने का यह रूट सही नहीं है। हमने उच्चाधिकारियों से इस संबंध में बात की है। अभी सभी किसानों को बराबर हिस्सेदारी में पानी दिया जाए ताकि धान का बीज तैयार हो सके। इसके बाद, रोपनी के समय आवश्यकतानुसार दोबारा नियमों में बदलाव किया जाएगा। इस मौके पर निरीक्षण टीम के साथ कई स्थानीय नेता, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के पीड़ित किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने विधायक की इस त्वरित पहल की सराहना की।

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