पीड़ित ने लगाया जमानिया पुलिस पर आरोप,नाबालिग को भगा ले जाने का मामला
जमानिया। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव से एक 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने पर पीड़ित परिवार ने स्थानीय थाना पुलिस पर लापरवाही और मामले में टालमटोल करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिस ने उनकी पूर्व की शिकायत पर गंभीरता दिखाई होती, तो आज उनकी बेटी गायब नहीं होती। शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुरुवार को अभियोग पंजीकृत दर्ज कर लिया है।
एक गांव निवासी पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया है कि उनकी नाबालिग पुत्री (जिसकी जन्मतिथि 03 जून 2009 है) को एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया है। घटना 25 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 12 बजे की है। घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी किशोरी का कुछ पता नहीं चल सका है और वह अभी तक घर नहीं लौटी है। पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक को दिए पत्र में जमानियां थाने की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना से कई दिन पूर्व 10 अप्रैल 2026 को ही किशोरी की माँ ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर किसी अनहोनी की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के कारण कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जिसका परिणाम यह हुआ कि आज उनकी बेटी घर से गायब है। इसके अलावा, पीड़ित का यह भी आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने उनकी बेटी का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले रखा है। जब वे अपना फोन मांगते हैं तो पुलिसकर्मी कहते हैं कि ‘सीओ साहब देंगे’, और जब सीओ साहब से इस बाबत पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि ‘थानाध्यक्ष देंगे’। इस प्रकार उन्हें लगातार गुमराह किया जा रहा है। पीड़ित परिवार ने इस टालमटोल और निष्क्रियता से आहत होकर एसपी से गुहार लगाई थी कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उनकी बेटी को तत्काल प्रभाव से बरामद किया जाए। 30 अप्रैल को उच्चाधिकारियों को सौंपे गए इस प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेते हुए, अंततः 7 मई 2026 को पुलिस ने इस मामले में अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक राम सजन नागर ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जांच की जा रही है।



