मशरुम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, खनिज लवण एवं अन्य औषधीय गुण पाए जाते है: सुभम कुमार गुप्ता

गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में विज्ञान संकाय के अन्तर्गत वनस्पति विज्ञान विषय के शोधार्थी सुभम कुमार गुप्ता ने अपने शोध प्रबन्ध शीर्षक “स्टडीज ऑन प्रॉपर्टीज ऑफ एडिबल (अग्रिकस ब्योसपोर्स ) एंड वाइल्ड मशरुम ऑफ ईस्टर्न उत्तर प्रदेश इंडिया” नामक विषय पर शोध प्रबंध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि मशरूम पोषण एवं औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ हैं। इसमें (बटन मशरूम) सबसे अधिक उगाया जाने वाला खाद्य मशरूम है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक प्रकार के जंगली मशरूम प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इस अध्ययन में खाद्य एवं जंगली मशरूमों के पोषण, जैव-रासायनिक तथा औषधीय गुणों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। परिणाम बताते हैं कि दोनों प्रकार के मशरूम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन एवं खनिजों से भरपूर होते हैं, जबकि जंगली मशरूमों में एंटीऑक्सीडेंट गुण अधिक पाए जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के खाद्य (Agaricus bisporus) एवं जंगली मशरूम पोषण और औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जहां Agaricus bisporus व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण है, वहीं जंगली मशरूम उच्च जैव सक्रिय गुणों के कारण अधिक संभावनाशील हैं। उचित अनुसंधान, जागरूकता एवं वैज्ञानिक खेती से मशरूम क्षेत्र में व्यापक विकास संभव है। मशरूम को कृषि प्रणाली में जोड़कर टिकाऊ खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। सावधानी रखते हुए इसका प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि खाद्य और विषैले मशरूम में अंतर करना कठिन होता है। मशरूम को “फंक्शनल फूड” कहा जाता है क्योंकि ये पोषण के साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं। अनुसंधान में पाया गया है कि मशरूम विभिन्न रोगों जैसे हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर एवं प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी में बहुत ही कारगर सिद्ध हुए है। प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति व अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा प्राध्यापकों व शोध छात्र – छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थी ने संतुष्टि पूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात महाविद्यालय की विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के सदस्यों तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान की। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह, प्रोफे० (डॉ०) अरुण कुमार यादव, प्रोफे० (डॉ०)सुनील कुमार, डॉ० रामदुलारे, शोध निर्देशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ० जे० के० राव, डॉ० अमरजीत सिंह, डॉ० इन्दीवर रत्न पाठक, प्रोफे० (डॉ०) रविशंकर सिंह, डॉ० गौतमी जैसवारा, प्रोफे० (डॉ०) सुनील कुमार, डॉ० अशोक कुमार, डॉ० अंजनी कुमार गौतम, डॉ० लव जी सिंह, डॉ० कमलेश,अमितेश सिंह शोध छात्रा सना अंसारी, अंकिता साहू, विवेक गुप्ता एवं अन्य प्राध्यापक गण व शोध छात्र छात्राएं आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ० जे० के० राव ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ० जी० सिंह ने किया।




