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हिंदी पत्रकार दिवस पर कवियों ने बिखेरी छटा


कश्मीर बुलाया तो बुरा मान गए, 370 हटाया तो बुरा मान गए

दिलदारनगर (गाजीपुर) : नगर के माई जी कुटिया परिसर में पत्रकार संघ के तत्वाधान में शनिवार की रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य की रसधारा फुट गई ।

अतिथियों व कवियों ने दीप प्रज्जवलन कर  कार्यक्रम की शुरुआत की।कवित्री विभा सिंह ने मां सरस्वती की वंदना से सम्मेलन का आगाज किया।कवियों व कवित्रियों ने मंच से राजनीतिक,सामाजिक कुरूतियों सहित ईरान व इजराइल के बीच चल रहे युद्ध पर भी कविताओ के माध्यम से खूब प्रहार किया।
          कवि हेमंत निर्भीक ने सुनाया की बहुत देर से लाल लेटा हुआ है तिरंगा से तन को लपेटा हुआ है,लहु थम गए है जो बहते थे अब तक,बहुत चोट तन में समेटे हुआ है सुनाया तो भारत माता के जयकारे से पंडाल गूंज उठा।

सीतापुर से पहुंची श्रृंगार रस की कवियित्री पिंकी अरविंद प्रजापति ने  ओढू बिछाऊँ जिसकी वह प्रीत हो गये है,मैं हार जाऊं खुद को वह जीत हो गये है,हर एक तीर दिल का तुझसे यही कहेगा ये अजनबी अभी तक मनमीत हो गये है सुनाकर सबको सोचने पर विवश कर दिया।

हास्य के कवि डंडा बनारसी ने कविताओं के माध्यम से भी राजनीति पर खूब प्रहार किया सुनाया की उनको कश्मीर बुलाया तो बुरा मान गये 370 हटाया तो बुरा मान गये।उनको सिंदूर का मतलब समझ में आया ,मैंने खटिया पर सुलाया तो बुरा मान गये सुन स्रोता लोट पोट हो गए।

मिर्जापुर से पहुंची कवित्री पूनम श्रीवास्तव ने सुबह लिख दूंगी शाम लिख दूंगी, राम के संग श्याम लिख दूंगी,लिखना होगा तो यह यकीन रखना  देश को मैं सलाम लिख दूंगी।

मध्य प्रदेश के सतना से पहुंचे हास्य कवि रवि चतुर्वेदी ने भी कविताओं के माध्यम से राजनीति पर चोट किया की हिंदी में इंग्लिश का पर्चा अजब बात है बाबू जी,राजनीत में नीट की चर्चा अजब रीत है बाबू जी सुनाकर खूब हंसाया।

वही हास्य कवि फजीहत गहमरी ने भी जो देश द्रोही हो उन्हें सूली चढ़ाइए, पत्थर चलाने वालों पर गोली चलाइए, यदि लिप्त दुराचार में मिले कोई बाबा ले जा कर अस्पताल में बधियां कराइए सुनकर स्रोता खूब ठहाके लगाये।

कवित्री विभा सिंह ने राम सीता के मन के कहानी है आप,शान पुरखो के आंखों के पानी है आप कोई कैसे जुदा मुझको कर पाएगा,गांव मैं हूं मेरी राजधानी है आप सुनाकर स्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया ।

देवरिया से पहुंचे ओज के कवि पंडित भूषण त्यागी ने  दर्द होता रहा छटपटाते रहे आईने से सदा चोट खाते रहे,वो वतन बेचकर मुस्कराते रहे हम वतन के लिए सिर कटाते रहे सुना कर श्रोताओं को आगाह भी किया।

खुर्शीद दिलदारनगरी ने भी अपनी काव्य रचनाओं को सुनाया। मुख्य अतिथि विधायक ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। जब जब  राजनीति लड़खड़ाती है तो साहित्यकार व पत्रकार उसे संभालने का कार्य किए हैं।कवि सम्मेलन का आयोजन हिंदी व साहित्य को जोड़ता है।इस तरह के आयोजनों से लोगों के अंदर आपसी मनमुटाव भी दूर होता है।चेयरमैन अविनाश जायसवाल ने कहा कि इस तरह का आयोजन समाज को एक नई दिशा देता है और लोगों का साहित्य के प्रति जुड़ाव होता है।वाराणसी के सर्जन डॉ विवेकानंद राय ने भी आयोजकों का आभार जताया।इस मौके पर मन्नू सिंह, दिनेश प्रधान,प्रवीण जायसवाल,उमेश वर्मा,अजित गुप्ता,शोभा जायसवाल,
अनिल यादव,सत्यनारायण वर्मा,विनोद वर्मा,विनोद अकेला,शमशाद खां, मिथलेश यादव,इमरान,लखन,सुरेंद्र गुप्ता,दीपक गुप्ता,सतेंद्र सिंह,सुरेश कश्यप, अरविंद जायसवाल,सदानंद साहू आदि लोग रहे।

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