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सूचना आयोग का सख़्त रुख: आदेशों की अवहेलना पर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जनसूचना अधिकारी पर गिरी गाज, कारण बताओ नोटिस जारी

गाजीपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम को हल्के में लेना खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, करण्डा खंड, गाजीपुर के जनसूचना अधिकारी को भारी पड़ गया। लगातार आदेशों की अनदेखी और सूचना देने में जानबूझकर टालमटोल पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनसूचना अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रकरण अपील संख्या S-10/A/0967/2025 की सुनवाई राकेश कुमार, माननीय राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अपीलार्थी राकेश सिंह ऑनलाइन उपस्थित रहे, जबकि जनसूचना अधिकारी एक बार फिर आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। आयोग के समक्ष अपीलार्थी ने स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि आज तक उन्हें वाजिब और सम्यक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। पत्रावली के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि आयोग के आदेश 11 नवंबर 2025 का भी जनसूचना अधिकारी द्वारा पालन नहीं किया गया। न तो सूचना दी गई और न ही कोई लिखित स्पष्टीकरण आयोग को भेजा गया, जबकि पर्याप्त अवसर प्रदान किए जा चुके थे। राज्य सूचना आयुक्त ने इसे आयोग के आदेशों की खुली अवहेलना और सूचना अधिकार कानून के प्रति घोर लापरवाही माना। आयोग ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जनसूचना अधिकारी का यह रवैया यह दर्शाता है कि वे आयोग के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसी के चलते आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अंतर्गत जनसूचना अधिकारी के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध धारा 20(1) के तहत 250 रूपए प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25,000 रूपए तक का अर्थदंड लगाया जाए तथा धारा 20(2) के तहत अनुशासनिक कार्यवाही की संस्तुति उनके नियोक्ता को भेजी जाए। आयोग ने कार्यालय को निर्देशित किया है कि सूचना आवेदन दिनांक 27 अगस्त 2025 की प्रति संलग्न कर कारण बताओ नोटिस जनसूचना अधिकारी को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाए।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। सूचना आयोग के इस सख्त कदम से यह संदेश साफ है कि सूचना के अधिकार से खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

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