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यूपी कालेज गोलीकांड में मृतक छात्र के घर पहुंचे एमएलसी चंचल, शोक संवेदना व्‍यक्‍त कर दी आर्थिक सहायता 

गाजीपुर। यूपी कॉलेज वाराणसी हत्या काण्ड में मारे गए गाजीपुर जनपद के दुबैठा निवासी ऋषि देव सिंह के इकलौते पुत्र सूर्य प्रताप सिंह के घर पहुँच कर एमएलसी विशाल सिंह चंचल ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की और अपने तरफ से परिवार को 5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की ,इस अवसर पर जिलाधिकारी गाजीपुर अविनाश कुमार और पुलिस अधीक्षक ईराज राजा उपस्थित रहे,,उन्होंने पूर्ण न्याय का भरोसा दिलाया और कहा कि दोषियों को बक्सा नहीं जाएगा,,,वाराणसी यूपी कॉलेज हत्याकांड में वर्चस्व की लड़ाई में बुझ गया घर का इकलौता चिराग,,वाराणसी के यूपी कॉलेज में आपसी रंजिश के चलते बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की सहपाठी मंजीत चौहान ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी. गाजीपुर निवासी सूर्य प्रताप सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. घटना के बाद कैंपस में भारी तोड़फोड़ हुई. पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं,,धर्म और शिक्षा की नगरी काशी के प्रतिष्ठित उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज के कैंपस में गुरुवार को जो मंजर दिखा, उसने पूरे शहर को दहला दिया. परीक्षाओं के माहौल के बीच गोलियों की तड़तड़ाहट ने न केवल एक छात्र की जान ले ली, बल्कि कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए. आपसी रंजिश और वर्चस्व की इस खूनी जंग में गाजीपुर के एक साधारण परिवार का इकलौता बेटा, सूर्य प्रताप सिंह उर्फ पवन हमेशा के लिए खामोश हो गया.सूर्य प्रताप सिंह (20), मूल रूप से गाजीपुर जिले के रामपुर माझा थाना क्षेत्र के दुबैठा गांव का रहने वाला था. वो यूपी कॉलेज में बीएससी (द्वितीय वर्ष) का छात्र था. सूर्य प्रताप सिंह के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उसका परिवार पिछले काफी समय से वाराणसी में ही रह रहा था,,उसके पिता, ऋषि देव सिंह, वाराणसी के अतुलानंद कॉलेज में प्रिंसिपल की गाड़ी चलाते हैं और माता किरण सिंह उसी विद्यालय में वार्डन रह चुकी हैं. सूर्य प्रताप सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था ,उनकी दो बेटियां भी हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और पूरा परिवार अतुलानंद विद्यालय कैंपस में ही मिले एक कमरे में रहता था. उनके पैतृक ग्रामवासियों के अनुसार, सूर्य प्रताप एक शालीन परिवार से ताल्लुक रखता था, जिसके चाचा दिल्ली और मुंबई में निजी नौकरियां करते हैं. हाल ही में वह होली पर गांव गया था, लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी होली होगी,,10 मिनट और 4 गोलियां,,घटना शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे की है. यूपी कॉलेज में इन दिनों असाइनमेंट और परीक्षाओं का दौर चल रहा है. सूर्य प्रताप और आरोपी मंजीत चौहान के बीच पुराना विवाद था. घटना से ठीक पहले प्रिंसिपल धर्मेंद्र कुमार सिंह ने दोनों को अपने ऑफिस बुलाकर समझाया था कि वे आपस में झगड़ा न करें. जैसे ही दोनों छात्र प्रिंसिपल के कमरे से बाहर निकले, आर्ट्स फैकल्टी के पास मंजीत चौहान और उसके साथी अनुज ने सूर्य प्रताप को घेर लिया.प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ते ही मंजीत ने पिस्टल निकाल ली. सूर्या जान बचाने के लिए भागा, लेकिन पहली गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा. इसके बाद मंजीत ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. सूर्या को चार गोलियां लगीं. हत्या को अंजाम देने के बाद मंजीत पहली मंजिल पर चढ़ा और पीछे की झाड़ियों में पिस्टल फेंककर दीवार फांदकर भाग निकला। जैसे ही सूर्या की मौत की खबर ट्रामा सेंटर से कॉलेज पहुंची, कैंपस युद्ध का मैदान बन गया. उग्र छात्रों ने आरोपी मंजीत की बाइक को चकनाचूर कर दिया और कॉलेज परिसर में जमकर तोड़फोड़ की. इस दौरान हुए पथराव में कुछ शिक्षक भी घायल हुए. छात्रों ने भोजूबीर मार्केट बंद करा दिया और धरने पर बैठ गए. उनकी मांग थी कि आरोपी का एनकाउंटर किया जाए और लापरवाही बरतने वाले प्रिंसिपल व चीफ प्रॉक्टर इस्तीफा दें। वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला,,देर शाम मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके साथी अनुज की तलाश जारी है। छात्रों का आरोप है कि मंजीत चौहान का आपराधिक इतिहास रहा है (शिवपुर थाने में दर्ज मुकदमे). सूर्या पिछले 10 दिनों से चिकन पॉक्स के कारण गांव में था, लेकिन प्रिंसिपल के बुलाने पर ही वह आज कॉलेज आया था. सवाल यह उठता है कि जब कॉलेज प्रशासन को दोनों के बीच पुरानी रंजिश का पता था, तो उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई गई? फिलहाल, दुबईथा गांव से लेकर वाराणसी के कॉलेज कैंपस तक सन्नाटा है. एक मां ने अपना बेटा खो दिया और एक पिता ने अपनी बुढ़ापे की लाठी।

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