
जमानियाँ, गाजीपुर। क्षेत्र के ग्राम बरुइन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आपात कालीन सेवा न संचालित होने से ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है वही डॉक्टर व कर्मचारियों की शत प्रतिशत नियमित उपस्थिति न होने से ओपीडी सेवा भी बाधित हो रही है। यहाँ तक छुट्टी के दिनों में भी आपातकालीन सेवा न चलना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अभिशाप बन गया है।
ज्ञात हो कि सन् 2003 में करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल का लोकार्पण तत्कालीन सांसद मनोज सिन्हा के कर कमलों द्वारा किया गया ताकि ग्रामीण क्षेत्र सहित नगरीय क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए भटकना न पड़े, लोकार्पण के बाद से ही यह अस्पताल स्वास्थ्य अधिकारियों की अनदेखी से बिमारी होकर वेटिलेटर पर पड़ा हुआ है तथा स्वस्थ होने की बांट खोज रहा है। अस्पताल में डाक्टर व कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद भी प्रतिदिन कम उपस्थिति होना व अस्पताल में उपकरण का आभाव चर्चा का विषय बना है। प्रसूती कक्ष, आपरेशन कक्ष सूना पड़ा हुआ है। सूत्रों की माने तो यह अस्पताल पीएचसी जमानियाँ द्वारा संचालित होता है। यहाँ के कर्मचारी ज्यादातर पीएचसी पर अटैच है। यहाँ कार्यालय कही दिखाई नहीं देता है। 30 बेड का अस्पताल होने के बाद भी लोगों को प्राइवेट व झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहना पड़ता है। रात में तबियत खराब हो जाने पर लोगों को जनपद या वाराणसी की दौड़ लगाई पड़ती है जो मरीज को भारी पड़ जाता है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का इस अस्पताल पर कोई असर नहीं दिखाई देता। ग्रामवासियों ने कहा कि इस अस्पताल के खुलने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी खुशी हुई लेकिन अस्पताल का संचालन ठीक ढंग से न होने से लोग काफी मायूस है। बकरीद के दिन अस्पताल बंद होना चर्चा का विषय है। आपातकाल में किसी की तबियत खराब होने पर झोला छाप डॉक्टरों का सहारा लेना ग्रामीण लोगों की मजबूरी बन गई है।इस संबंध में जिलाधिकारी गाज़ीपुर से जानने का प्रयास किया गया परंतु उनका फोन नहीं उठा।अब अगर डीएम हुजुर की नजरें इनायत हो जाय तो यह अस्पताल मरीजों के लिए बरदान बन जाय।




