उत्तर प्रदेशगाजीपुरप्रयागराजप्रशासनिक

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एडवोकेट दीपक कुमार पाण्डेय की याचिका पर मानवाधिकार आयोग का बड़ा एक्शन, जिलाधिकारी गाजीपुर को नोटिस जारी

प्रयागराज / गाजीपुर:
उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय द्वारा योजित एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने गाजीपुर जिले में हुई एक गंभीर घटना के मामले में जिलाधिकारी (DM) गाजीपुर को पुनः नोटिस जारी करते हुए मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट तलब की है। 
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम रुकंदीपुर के निवासी सीताराम उपाध्याय की कथित तौर पर ‘कस्टोडियल डेथ’ (हिरासत में मौत) हो गई थी। यह घटना 13 सितंबर 2025 को घटित हुई थी। इस गंभीर मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के चैंबर नंबर 184C में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष एक याचिका (डायरी संख्या: 19582/CR/2025) दाखिल की थी। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 15 सितंबर 2025 को पंजीकृत कर लिया था। 
मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) की रिपोर्ट पर आयोग की टिप्पणी
मामले की हालिया सुनवाई के दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO), गाजीपुर द्वारा 30 फरवरी 2026 (रिकॉर्ड अनुसार) को आयोग के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसे आयोग ने रिकॉर्ड पर लिया है। मुख्य राजस्व अधिकारी की इस रिपोर्ट के अवलोकन से यह साफ हुआ है कि मृतक सीताराम उपाध्याय की हिरासत में हुई मौत के संबंध में मजिस्ट्रेट जांच (Magisterial Inquiry) अभी भी प्रक्रियाधीन (चल रही) है। 
मानवाधिकार आयोग का सख्त निर्देश
इस मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने जिलाधिकारी, गाजीपुर को सख्त निर्देश जारी किए हैं:
जांच रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि: जिलाधिकारी गाजीपुर को निर्देशित किया गया है कि वे चल रही मजिस्ट्रेट जांच की विस्तृत रिपोर्ट 15 जुलाई 2026 या उससे पहले हर हाल में आयोग को प्रेषित करें। 
अगली सुनवाई: इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए आयोग ने 16 जुलाई 2026 की तारीख तय की है, जिस दिन इस फाइल को दोबारा आयोग के समक्ष पेश किया जाएगा। 
नोट: इस मामले में आयोग द्वारा अब तक (शुरुआत से लेकर 24 अप्रैल 2026 तक) जिलाधिकारी गाजीपुर को कुल 5 बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिससे साफ है कि मानवाधिकार आयोग इस हिरासत में मौत के मामले को लेकर बेहद संवेदनशील और सख्त है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page