
जमानियां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नगर के माधव बस्ती में संघ द्वारा आयोजित विजयादशमी उत्सव सह पथ संचलन बड़े ही भव्य और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम शिवाजी शाखा मैदान पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गणवेशधारी स्वयंसेवक, स्वयंसेवकाएं और बहनें शामिल हुईं।
कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजन से हुई, जिसके बाद ध्वजारोहण किया गया। तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री अशोक राय ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होना देश के लिए गर्व का क्षण है। संघ की यह यात्रा केवल संगठन की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि संघ ने कठिन परिस्थितियों में भी समाज को जोड़ने और एकता की भावना को सशक्त करने का कार्य किया है। मुख्य वक्ता ने संघ द्वारा निर्धारित ‘पंच परिवर्तन’ पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ये परिवर्तन केवल विचारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे, तब देश स्वतः प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और परिवार संस्कार के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि “परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है, और यदि परिवार संस्कारित होंगे, तो समाज और राष्ट्र भी संस्कारित बनेंगे। उन्होंने आग्रह किया कि हर परिवार सप्ताह में एक दिन भजन, पूजा या संवाद के लिए साथ बैठे ताकि सांस्कृतिक चेतना और संवाद की परंपरा सुदृढ़ हो। कार्यक्रम के अंत में पथ संचलन निकाला गया, जो शिवाजी शाखा मैदान से प्रारंभ होकर माधव बस्ती, कंकड़वा घाट, बाजार चौराहा होते हुए पुनः शिवाजी शाखा मैदान पर संपन्न हुआ। इस दौरान सड़कों पर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे गूंजते रहे। नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुलाब चंद्र जी ने की, जबकि संचालन, अमृत वचन एवं प्रार्थना अभय शंकर सोनी जी ने कराया। नगर कार्यवाह श्री माधव पांडेय जी ने एकल गीत प्रस्तुत किया और अतिथियों का आभार प्रकट किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, देशभक्ति और संगठन की एकता की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसने नगरवासियों को राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत कर दिया। इस अवसर पर देवब्रत‚ तारकेश्वर वर्मा, धनंजय मिश्रा‚ अनुपम वर्मा‚ अमित, राजीव पाण्डेय, नारायण दास, सोना, वैष्णवी आदि स्वयंसेवक मौजूद रहे।




