बरेका कर्मचारी की बेटी सुधि सिंह की डॉक्यूमेंट्री को अंतरराष्ट्रीय पहचान


सुधि सिंह
‘द डोम्स: किंग्स ऑफ द पायर’ में काशी के डोम समुदाय के जीवन, सामाजिक चुनौतियों और स्वास्थ्य जोखिमों का मार्मिक चित्रण
वाराणसी। काशी के श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार से जुड़े डोम समुदाय के जीवन और उनकी चुनौतियों को पर्दे पर उतारने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द डोम्स: किंग्स ऑफ द पायर’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इस फिल्म का निर्देशन वाराणसी स्थित क्रिमसन वर्ल्ड स्कूल की कक्षा 12 की छात्रा सुधि सिंह ने किया है। उनकी इस उपलब्धि ने युवा प्रतिभा के साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशील दृष्टि को भी सामने लाया है।
सुधि सिंह की इस डॉक्यूमेंट्री में काशी के हरिश्चंद्र घाट सहित अन्य श्मशान घाटों पर कार्य करने वाले डोम समुदाय के दैनिक जीवन, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और काम के दौरान सामने आने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म के माध्यम से समुदाय की कार्य परिस्थितियों और उनके सामने मौजूद कठिनाइयों को समझने का अवसर मिलता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिल्म को गोल्डन लायन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, क्राउन वुड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, सुंदरबन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, इंडियन इंडिपेंडेंट फिल्म फेस्टिवल तथा एशियन इंटरनेशनल फिल्मफेयर अवॉर्ड्स सहित कई फिल्म समारोहों में पुरस्कार एवं सम्मान मिले हैं। इसके अलावा, एशियन इंडिपेंडेंट फिल्म फेस्टिवल के 12वें सीजन में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ नवोदित फिल्म निर्माता श्रेणी में विशेष उल्लेख (ऑनरेबल मेंशन) प्राप्त हुआ।
फिल्म का चयन वैंकूवर इंटरनेशनल यूथ फिल्म फेस्टिवल, ब्लू बर्ड फिल्म फेस्टिवल, चेन्नई इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल और नई दिल्ली फिल्म फेस्टिवल के लिए भी किया गया है। विभिन्न फिल्म समारोहों में मिली इस पहचान से सुधि सिंह के निर्देशन और सामाजिक विषयों पर आधारित कहानी कहने के प्रयास को व्यापक मंच मिला है।
डॉक्यूमेंट्री के जरिए सुधि सिंह ने काशी की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े एक महत्वपूर्ण समुदाय के जीवन, कामकाज और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को सामने लाने का प्रयास किया है। साथ ही, फिल्म सामाजिक परिस्थितियों और आर्थिक चुनौतियों पर सार्थक संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
उल्लेखनीय है कि सुधि सिंह के पिता बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में कार्यरत हैं। छात्रा की इस उपलब्धि को युवा पीढ़ी की रचनात्मक क्षमता और सामाजिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।यह जानकारी बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने दी।



