ग़ज़ल संग्रह ‘हवाओं में ज़हर है’ का भव्य विमोचन, साहित्यकारों ने रचनाओं को सराहा

दुष्यंत कुमार की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं रामपुकार ग़ाज़ीपुरी : राजेंद्र सिंह
जमानियां (गाजीपुर)। स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को महाविद्यालय और साहित्य सौरभ परिषद के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ ग़ज़लकार रामपुकार सिंह ग़ाज़ीपुरी के ग़ज़ल संग्रह ‘हवाओं में ज़हर है’ का भव्य विमोचन किया गया। समारोह में साहित्यकारों और विद्वानों ने पुस्तक की विषयवस्तु तथा समकालीन सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य सौरभ परिषद के संस्थापक राजेंद्र सिंह ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखक कामेश्वर द्विवेदी तथा विशिष्ट अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. श्रीनिवास सिंह रहे। समारोह का शुभारंभ मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों को पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि कामेश्वर द्विवेदी ने कहा कि ‘हवाओं में ज़हर है’ आज के समाज की सच्चाई को अभिव्यक्त करता है। वर्तमान समय में केवल वातावरण ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी बिखरता जा रहा है। ऐसे दौर में रामपुकार ग़ाज़ीपुरी की रचनाओं में सार्थक संभावनाएं दिखाई देती हैं। वहीं डॉ. ऋचा राय ने कहा कि उनकी ग़ज़लों में जीवन की विभिन्न समस्याओं को रचनात्मक ढंग से उकेरने और उन्हें संवारने का प्रयास किया गया है।
काव्य पाठ के दौरान कृष्णा मिट्ठू ने ‘माता-पिता’ शीर्षक ग़ज़ल प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। कवि दामोदर दबंग ने ‘ज़माने से ऊपर जमानियां’ और ‘वीरों की धरती गाजीपुर’ शीर्षक कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान विजय शंकर पाण्डेय, गिरीश पांडे, राजेंद्र भारती, हरिशंकर पांडेय, रंग बहादुर सिंह, नागेंद्र दुबे, हर्षिता दुबे, महेंद्र प्रताप सिंह, श्याम नारायण पाण्डेय, रामप्रकाश उपाध्याय, चंद्र भूषण सिंह, मनोज कुमार गुप्ता और डॉ. सुरेश राय ने भी अपने विचार रखे।
अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र सिंह ने कहा कि सत्तर के दशक में दुष्यंत कुमार ने हिंदी ग़ज़ल को नई पहचान और दिशा दी। उन्होंने ग़ज़ल को राजदरबारों और रूमानी महफिलों से निकालकर जनजीवन तथा आम आदमी के संघर्षों से जोड़ा। रामपुकार ग़ाज़ीपुरी इसी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने किया, जबकि आभार लेखक रामपुकार सिंह ग़ाज़ीपुरी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर आईक्यूएसी प्रभारी प्रो. अरुण कुमार, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



