बेबसी की तस्वीरों के बीच प्रशासन की मानवीय संवेदना आई सामने

जमानिया। जब सरकारी बुलडोजर कानून के तहत चलता है तो अक्सर बेबसी की तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन प्रशासन ने यह साबित कर दिया कि नियम-कायदों से ऊपर इंसानियत और संविधान की मूल भावना होती है। सब्बलपुर कलां में अतिक्रमण हटने के बाद बेघर हुई आशा देवी के आंसुओं को पोंछते हुए प्रशासन ने शुक्रवार को उन्हें दो लाख रुपये का सहायता चेक सौंपा और मुख्यमंत्री आवास की भी स्वीकृत किया।
सब्बलपुर कलां गांव स्थित गाटा संख्या 888 पर आशा देवी पत्नी बीरबल का रिहायशी आशियाना था। 23 सितंबर को सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के दौरान उनका मकान ढहा दिया गया था। कार्रवाई पूरी होने के बाद जब प्रशासन ने देखा कि बेहद गरीब आशा देवी के पास सिर छिपाने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है, तो अधिकारियों का दिल पसीज गया। उपजिलाधिकारी निधि ने मामले में सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रहकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार की संवेदनशीलता को आगे रखा। उन्होंने तुरंत उच्चाधिकारियों को आख्या भेजकर महिला की दयनीय आर्थिक स्थिति और बेघरी का हवाला देते हुए आर्थिक अनुदान की सिफारिश की। जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्काल संज्ञान लेते हुए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी एवं राइफल क्लब, शाखा गाजीपुर के फंड से आशा देवी के नाम एक- एक लाख रुपये का चेक तैयार कराया गया। शुक्रवार को स्वयं उपजिलाधिकारी निधि और स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. रूद्रकांत सिंह सब्बलपुर पहुंचे और आशा देवी को यह चेक सौंपा और मुख्यमंत्री आवास स्वीकृती की जानकारी दी। प्रशासन की इस मानवीय पहल ने न केवल एक बेसहारा परिवार को नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की उम्मीद दी, बल्कि समाज में यह संदेश भी दिया कि व्यवस्था का असली मकसद उजाड़ना नहीं, बल्कि कमजोरों को संबल देना है।


