भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार से नागरिकों तक सभी को मिलकर करना होगा संघर्ष

गाजीपुर। पीजी कॉलेज में अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ और विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में पूर्व शोध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन सेमिनार हाल में किया गया। इसमें समाजशास्त्र के शोधार्थी संदीप कुमार ने अपने शोध प्रबंध ‘भारत में राजनीतिक भ्रष्टाचार : कारण एवं निवारण-एक समाजशास्त्रीय अध्ययन (उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के विशेष अध्ययन पर आधारित)’ विषय पर शोध प्रस्तुत किया।
संदीप कुमार ने कहा कि राजनीतिक भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अनियमितता का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिकों के राजनीतिक विश्वास से जुड़ा व्यापक सामाजिक प्रश्न है। चुनावी राजनीति में धनबल, राजनीतिक संरक्षणवाद, भाई-भतीजावाद, सत्ता एवं पद के दुरुपयोग, प्रशासनिक निर्णयों में अनुचित हस्तक्षेप और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग जैसी प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचने में बाधा आ सकती है और सामाजिक असमानता बढ़ सकती है। शोध में उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के संदर्भ में पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों, ग्रामीण सामाजिक संरचना, प्रवासन, सीमित रोजगार के अवसर, स्थानीय राजनीतिक संबंधों और पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक भ्रष्टाचार के अध्ययन पर जोर दिया गया।
शोधार्थी ने कहा कि राजनीतिक भ्रष्टाचार का समाधान केवल कठोर कानून बनाने से संभव नहीं है। इसके लिए पारदर्शी शासन, जवाबदेही, चुनावी सुधार, सामाजिक अंकेक्षण, सूचना के अधिकार का प्रभावी उपयोग, डिजिटल प्रशासन, नागरिक जागरूकता और नैतिक राजनीतिक संस्कृति को मजबूत करना जरूरी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी संघर्ष के लिए सरकार, राजनीतिक दलों, प्रशासन, मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज को मिलकर कार्य करना होगा।
शोध प्रस्तुतीकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के सदस्यों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका संदीप कुमार ने उत्तर दिया। इसके बाद समिति और महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राघवेंद्र कुमार पांडेय ने शोध प्रबंध विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान की।
इस दौरान अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. (डॉ.) जी. सिंह, मुख्य नियंता प्रो. (डॉ.) सुजीत कुमार सिंह, शोध निर्देशक डॉ. मोहन, समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिमूर्ति सिंह सहित प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन प्रो. (डॉ.) जी. सिंह ने किया। अंत में डॉ. रुचिमूर्ति सिंह ने सभी के प्रति आभार जताया।



